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दहेज प्रथा

  • Writer: Anmol Dheer
    Anmol Dheer
  • Nov 30, 2022
  • 2 min read

आज का ब्लॉग स्पेशलय हम हिंदी में लिख रहे है ताकि सबको पता चल सके की दहेज़ लेना और देना कितना गलत है

आज भी हमारे देश में बहुत सारी ऐसी जगह है जहा दहेज़ प्रथा होती है। आज भी माँ बाप अपनी बेटी के दहेज़ के चिंता करते है। आज भी जब एक लड़की की शादी होती है तो उसके माँ बाप से सबसे पहले यही पूछा जाता है की आप दहीज कितना दोगे। सब लोग बोलते है की दहेज़ प्रथा ख़तम हो गयी है पर सच तो यह है की इतने कानून बनने के बावजूद भी दहेज़ प्रथा है।

दहेज़ एक ऐसी चीज है जो बहुत से लोगो का पूरा का पूरा घर उजाड़ देती है। दहेज़ की वजह से बहुत से घर तबाह हो जाते है। कुछ माँ नाप अपनी बेटी को कुंवारा नहीं देख सकते इसलिए वो अपनी जान ले लेते है या फिर कुछ लड़किया अपने माँ बाप को ऐसी हालत में नहीं देख सकती इसलिए वो अपनी जान ले लेती है। आज भी कितने सारे गाओ ऐसे है जहा पर लड़की पैदा होते है मार देते है क्युकी आज भी उनकी सोच यही है की लड़की है अगर दहेज़ नहीं दिया तो कोई शादी नहीं करेगा और अगर शादी नहीं होगी तो हम सारी ज़िन्दगी घर पर बिठा कर खिला तो नहीं सकते

दहेज़ मांगना बहुत आसान है लेकिन देना बहुत मुश्किल है। लड़के वालो के पास चाहे किसी चीज़ की कमी न हो लेकिन फिर भी दहेज़ तो उसको चाहिए है चाहिए। माँ बाप अपनी पूरी कमाई , खून पसीना लगा देते है दहेज़ को जमा करने में ताकि वो अपनी लड़की की शादी कर सके अच्छे से और उनकी लड़की खुश रहे अपने ससुराल में। पर दहेज़ प्रथा यही ख़तम नहीं होती बल्कि बहुत सी लड़कियों को शादी के बाद उसके ससुराल वाले इतना पेरशान करते है, इतने ताने लड़की को सुनते है की तेरे घरवालों ने दहेज़ सिर्फ इतना सा दिया है। लड़की को इतना टॉर्चर कर देते है की उसके पास अपनी जान लेने के आलावा कोई और रास्ता नज़र नहीं आता।

इतने कानून होने के बाद भी लड़किया यह सब सहन कर रही है और शायद आगे भी करती रहेगी। वैसे हम लोग बोलते है की लड़कियों के लिए इतने कानून बने हुए है लेकिन इन सबके बावजूद भी लड़किया अपनी जान देने पर मजबूर है क्युकी लड़के वालो को दहेज़ नहीं मिला अरे शादी तो एक पवित्र रिश्ता होता है एक नया परिवार का बंदता है। लेकिन हम शादी को सिर्फ दहेज़ की नज़र से देखते है।

आज भी लड़कियों में हिम्मत नहीं है की वो इनसबके खिलाफ आवाज उठा सके क्युकी उनके डर रहता है अपने माँ बाप की इज़्ज़त का।


Written by : Anmol Dheer

Ishita khanna

 
 
 

2 comentários

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Anjli Verma
Anjli Verma
30 de nov. de 2022

बहुत खूब लिखा है आपने हम सभी को जरुरत है अपनी सोच को बदलने की

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smita
smita
30 de nov. de 2022

Quite true words!

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